6 worked answers · short steps first, explanations when you need them
अभ्यास
Textbook pages NCERT वितान भाग 2, अध्याय 2
Question अभ्यास प्रश्न, 1
‘जूझ’ शीर्षक कथा-नायक की केंद्रीय विशेषता कैसे उजागर करता है?
Steps only
कथा-नायक आनंद पढ़ना चाहता है, लेकिन पिता उसे खेत के काम में लगाए रखना चाहते हैं। वह माँ और दत्ता जी राव की मदद से फिर स्कूल जाता है। स्कूल में पिछड़ने और साथियों की हँसी के बावजूद वह पढ़ाई नहीं छोड़ता। कविता में रुचि लेकर वह आगे बढ़ता है। इसलिए ‘जूझ’ शीर्षक उसके लगातार संघर्ष और हार न मानने के स्वभाव को दिखाता है।
Answer
कथा-नायक आनंद पढ़ना चाहता है, लेकिन पिता उसे खेत के काम में लगाए रखना चाहते हैं। वह माँ और दत्ता जी राव की मदद से फिर स्कूल जाता है। स्कूल में पिछड़ने और साथियों की हँसी के बावजूद वह पढ़ाई नहीं छोड़ता। कविता में रुचि लेकर वह आगे बढ़ता है। इसलिए ‘जूझ’ शीर्षक उसके लगातार संघर्ष और हार न मानने के स्वभाव को दिखाता है।
Question अभ्यास प्रश्न, 2
स्वयं कविता रच लेने का आत्मविश्वास लेखक के मन में कैसे पैदा हुआ?
Steps only
सौंदलगेकर मास्टर कविता को भाव और लय के साथ पढ़ाते थे। लेखक उनकी प्रस्तुति से प्रभावित हुआ और कविताएँ गाने लगा। अकेले खेत में काम करते समय वह कविता का अभिनय और अपनी धुन बनाने लगा। शिक्षक ने उसकी कोशिश की प्रशंसा की और उसे कविता-संग्रह दिए। इससे उसे लगा कि वह भी कविता लिख सकता है।
Answer
सौंदलगेकर मास्टर कविता को भाव और लय के साथ पढ़ाते थे। लेखक उनकी प्रस्तुति से प्रभावित हुआ और कविताएँ गाने लगा। अकेले खेत में काम करते समय वह कविता का अभिनय और अपनी धुन बनाने लगा। शिक्षक ने उसकी कोशिश की प्रशंसा की और उसे कविता-संग्रह दिए। इससे उसे लगा कि वह भी कविता लिख सकता है।
Question अभ्यास प्रश्न, 3
सौंदलगेकर मास्टर की किन विशेषताओं ने लेखक के मन में कविता के प्रति रुचि जगाई?
Steps only
वे कविता को केवल पढ़ते नहीं थे, बल्कि गाकर, लय और अभिनय के साथ उसका भाव समझाते थे। वे अलग-अलग कवियों की रचनाएँ और अपने अनुभव भी सुनाते थे। उनकी कक्षा जीवंत लगती थी। उन्होंने लेखक की रचनाओं को ध्यान से सुना, सराहा और छंद, भाषा तथा अलंकार की बातें सरलता से समझाईं। इससे लेखक की रुचि बढ़ी।
Answer
वे कविता को केवल पढ़ते नहीं थे, बल्कि गाकर, लय और अभिनय के साथ उसका भाव समझाते थे। वे अलग-अलग कवियों की रचनाएँ और अपने अनुभव भी सुनाते थे। उनकी कक्षा जीवंत लगती थी। उन्होंने लेखक की रचनाओं को ध्यान से सुना, सराहा और छंद, भाषा तथा अलंकार की बातें सरलता से समझाईं। इससे लेखक की रुचि बढ़ी।
Question अभ्यास प्रश्न, 4
कविता से लगाव से पहले और बाद में लेखक की अकेलेपन के प्रति धारणा कैसे बदली?
Steps only
कविता से पहले खेत में अकेले काम करना लेखक को उबाऊ लगता था; वह किसी साथी की तलाश करता था। कविता सीखने के बाद वही अकेला समय उसे अच्छा लगने लगा। वह खुलकर गा सकता था, अभिनय कर सकता था और अपनी धुन बना सकता था। इस तरह अकेलापन रचनात्मक अभ्यास का अवसर बन गया।
Answer
कविता से पहले खेत में अकेले काम करना लेखक को उबाऊ लगता था; वह किसी साथी की तलाश करता था। कविता सीखने के बाद वही अकेला समय उसे अच्छा लगने लगा। वह खुलकर गा सकता था, अभिनय कर सकता था और अपनी धुन बना सकता था। इस तरह अकेलापन रचनात्मक अभ्यास का अवसर बन गया।
Question अभ्यास प्रश्न, 5
पढ़ाई के बारे में लेखक और दत्ता जी राव का रवैया सही था या पिता का? तर्क सहित उत्तर दें।
Steps only
लेखक और दत्ता जी राव का रवैया अधिक उचित था, क्योंकि शिक्षा से लेखक को आगे के अवसर मिल सकते थे। पिता खेती के काम और घर की जरूरतों को प्राथमिकता देते थे, इसलिए उनकी चिंता भी समझी जा सकती है। लेकिन बच्चे की पढ़ाई पूरी तरह रोकना समाधान नहीं था। काम और पढ़ाई का संतुलित समय बनाना बेहतर रास्ता था।
Answer
लेखक और दत्ता जी राव का रवैया अधिक उचित था, क्योंकि शिक्षा से लेखक को आगे के अवसर मिल सकते थे। पिता खेती के काम और घर की जरूरतों को प्राथमिकता देते थे, इसलिए उनकी चिंता भी समझी जा सकती है। लेकिन बच्चे की पढ़ाई पूरी तरह रोकना समाधान नहीं था। काम और पढ़ाई का संतुलित समय बनाना बेहतर रास्ता था।
Question अभ्यास प्रश्न, 6
यदि लेखक और उसकी माँ दत्ता जी राव से पिता पर दबाव डलवाने के लिए झूठ का सहारा न लेते, तो आगे क्या हो सकता था? अनुमान लगाइए।
Steps only
यदि वे कुछ न कहते, तो पिता शायद लेखक को खेत के काम में ही लगाए रखते और उसकी पढ़ाई देर से शुरू होती या रुक जाती। दत्ता जी राव को परिवार की पूरी स्थिति पता न चलती, इसलिए वे हस्तक्षेप भी न कर पाते। यह अनुमान है; कहानी दिखाती है कि उस समय माँ-बेटे को प्रभावशाली व्यक्ति की मदद चाहिए थी। बेहतर उपाय सच बताकर किसी विश्वसनीय बड़े से सहायता माँगना होता।
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यदि वे कुछ न कहते, तो पिता शायद लेखक को खेत के काम में ही लगाए रखते और उसकी पढ़ाई देर से शुरू होती या रुक जाती। दत्ता जी राव को परिवार की पूरी स्थिति पता न चलती, इसलिए वे हस्तक्षेप भी न कर पाते। यह अनुमान है; कहानी दिखाती है कि उस समय माँ-बेटे को प्रभावशाली व्यक्ति की मदद चाहिए थी। बेहतर उपाय सच बताकर किसी विश्वसनीय बड़े से सहायता माँगना होता।