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कविता के साथ
Textbook pages NCERT आरोह भाग 2, अध्याय 5
Question कविता के साथ, प्रश्न 1
“उषा” कविता के किन उपमानों से गाँव की सुबह का बदलता हुआ शब्द-चित्र बनता है?
Steps only
नीला शंख, गीला चौका, काली सिल पर लाल केसर और स्लेट पर लाल रंग—ये उपमान गाँव की सुबह के बदलते रंगों का दृश्य बनाते हैं।
Answer
नीला शंख, गीला चौका, काली सिल पर लाल केसर और स्लेट पर लाल रंग—ये उपमान गाँव की सुबह के बदलते रंगों का दृश्य बनाते हैं।
Question कविता के साथ, प्रश्न 2
“उषा” कविता में क्या-क्या परिवर्तन होते हैं? “भोर का नभ / राख से लीपा हुआ चौका” और आगे के बिंबों के आधार पर बताइए।
Steps only
नीले आकाश से गीले चौके, काली सिल पर केसर और स्लेट पर लाल खड़िया तक के बिंब सुबह के बदलते रंग दिखाते हैं। सूर्य निकलने पर उषा का जादू टूटता है।
Answer
भोर में आकाश पहले नीले शंख जैसा दिखता है। फिर राख से लीपे, गीले चौके और काली सिल पर लाल केसर जैसा लगता है। लालिमा बढ़ने पर स्लेट पर लाल खड़िया का बिंब आता है। अंत में सूर्य निकलता है और उषा का जादू टूट जाता है। ये क्रमिक बिंब सुबह के बदलते रंग दिखाते हैं।
अपनी रचना
Textbook pages NCERT आरोह भाग 2, अध्याय 5
Question अपनी रचना
अपने आसपास की चीज़ों के उपमान लेकर सूर्योदय और सूर्यास्त का छोटा शब्द-चित्र लिखिए।
Steps only
नमूना: “सुबह का आकाश गुलाबी रंग से भरता है। शाम की सुनहरी रोशनी धीरे-धीरे नीली रात में घुल जाती है।” अपने आसपास के दृश्य जोड़ें।
Answer
नमूना: “सुबह का आकाश गुलाबी रंग से भरता है। शाम की सुनहरी रोशनी धीरे-धीरे नीली रात में घुल जाती है।” अपने आसपास के दृश्य जोड़ें।
आपसदारी
Textbook pages NCERT आरोह भाग 2, अध्याय 5
Question आपसदारी
“उषा”, प्रसाद की “बीती विभावरी जाग री” और अज्ञेय की “बावरा अहेरी” को उपमान, शब्द-चयन और परिवेश के आधार पर तुलना कीजिए। फिर बताइए कि आपको कौन-सी कविता अधिक अच्छी लगी और क्यों।
Steps only
“उषा” में घरेलू बिंब हैं, प्रसाद की कविता में पनघट और घट, और अज्ञेय की कविता में प्रकाश का जाल। तीनों के परिवेश और शब्द अलग हैं। अपनी पसंद का कारण भी लिखें।
Answer
तीनों कविताएँ सुबह का दृश्य बनाती हैं, पर उनके उपमान अलग हैं। “उषा” में नीला शंख, राख से लीपा चौका और काली सिल जैसे घर-गाँव के परिचित बिंब हैं। प्रसाद की “बीती विभावरी जाग री” में आकाश को पनघट और तारों को घट मानकर प्रकृति को मानवीय रूप दिया गया है। अज्ञेय की “बावरा अहेरी” में प्रकाश को जाल फैलाने वाले शिकारी की तरह दिखाया गया है, जो पूरे परिवेश को अपने साथ लेता है। इस तरह “उषा” का परिवेश घरेलू और ग्रामीण, प्रसाद का प्रकृति-सौंदर्य से भरा, और अज्ञेय का विस्तृत तथा गतिशील है। नमूना पसंद: मुझे “उषा” पसंद है, क्योंकि इसके परिचित बिंबों से सुबह का बदलता दृश्य आसानी से समझ आता है। विद्यार्थी अपनी पसंद का कारण बदल सकते हैं।