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कक्षा 12 · Aroh · अध्याय 13

पहलवान की ढोलक — फणीश्वरनाथ रेणु

लुट्टन पहलवान के संघर्ष, लोककला और गाँव को ढोलक से मिले साहस को समझें।

17 उत्तरसरल हिंदी

17 worked answers · short steps first, explanations when you need them

पाठ के साथ

Textbook pages NCERT आरोह भाग 2, अध्याय 13

Question पाठ के साथ, q1

कुश्ती के समय ढोल की ताल का लुट्टन के दाँव-पेंच से क्या मेल था? ढोल की ध्वनि और कहानी के ध्वन्यात्मक शब्द कैसा अनुभव कराते हैं?

Steps only

ढोल की तेज और बदलती ताल लुट्टन के तेज दाँव और शरीर की चाल को बल देती थी। ताल सुनते ही वह कुश्ती के लिए तैयार हो जाता था। “चटाक्-पट-धा” जैसे शब्द मन में तेज, गूँजती और जोश जगाने वाली आवाज़ बनाते हैं।

Answer

ढोल की तेज और बदलती ताल लुट्टन के तेज दाँव और शरीर की चाल को बल देती थी। ताल सुनते ही वह कुश्ती के लिए तैयार हो जाता था। “चटाक्-पट-धा” जैसे शब्द मन में तेज, गूँजती और जोश जगाने वाली आवाज़ बनाते हैं।

Question पाठ के साथ, q2

कहानी के अलग-अलग मोड़ों पर लुट्टन के जीवन में कौन-से बदलाव आए?

Steps only

लुट्टन बचपन में कठिन परिस्थितियों से निकला और कुश्ती में नाम कमाया। राजा ने उसे संरक्षण दिया, जिससे वह राज-पहलवान बना। राजा की मृत्यु और नई व्यवस्था आने पर उसका दरबार से संबंध टूट गया। वह गाँव लौटकर युवाओं को कुश्ती सिखाने लगा; महामारी और बेटों की मृत्यु ने उसके जीवन का अंतिम कठिन दौर बनाया।

Answer

लुट्टन बचपन में कठिन परिस्थितियों से निकला और कुश्ती में नाम कमाया। राजा ने उसे संरक्षण दिया, जिससे वह राज-पहलवान बना। राजा की मृत्यु और नई व्यवस्था आने पर उसका दरबार से संबंध टूट गया। वह गाँव लौटकर युवाओं को कुश्ती सिखाने लगा; महामारी और बेटों की मृत्यु ने उसके जीवन का अंतिम कठिन दौर बनाया।

Question पाठ के साथ, q3

लुट्टन ने ढोल को अपना गुरु क्यों कहा होगा?

Steps only

ढोल की आवाज़ ने लुट्टन को कुश्ती के समय लय और साहस दिया। वह ढोल की ताल पर अभ्यास करता और उसके संकेतों के साथ दाँव लगाता था। ढोल उसके लिए केवल वाद्य नहीं, बल्कि प्रशिक्षण और जीवन भर के सहारे का प्रतीक था।

Answer

ढोल की आवाज़ ने लुट्टन को कुश्ती के समय लय और साहस दिया। वह ढोल की ताल पर अभ्यास करता और उसके संकेतों के साथ दाँव लगाता था। ढोल उसके लिए केवल वाद्य नहीं, बल्कि प्रशिक्षण और जीवन भर के सहारे का प्रतीक था।

Question पाठ के साथ, q4

महामारी और अपने बेटों की मृत्यु के बाद भी लुट्टन ढोल क्यों बजाता रहा?

Steps only

गाँव के लोग बीमारी और शोक से टूट रहे थे। ढोल की आवाज़ उन्हें याद दिलाती थी कि वे अकेले नहीं हैं और उनमें अभी हिम्मत बाकी है। बेटों की मृत्यु के बाद ढोल बजाना लुट्टन के अपने दुख से जूझने का तरीका भी था।

Answer

गाँव के लोग बीमारी और शोक से टूट रहे थे। ढोल की आवाज़ उन्हें याद दिलाती थी कि वे अकेले नहीं हैं और उनमें अभी हिम्मत बाकी है। बेटों की मृत्यु के बाद ढोल बजाना लुट्टन के अपने दुख से जूझने का तरीका भी था।

Question पाठ के साथ, q5

ढोलक की आवाज़ का गाँव के लोगों पर क्या प्रभाव पड़ता था?

Steps only

रात की नीरवता में ढोलक की आवाज़ बीमार और निराश लोगों को साहस देती थी। उन्हें कुश्ती का दृश्य याद आता और वे मृत्यु के डर से कुछ देर बाहर निकल पाते थे। ढोल बीमारी का इलाज नहीं था, पर उसने लोगों को मानसिक सहारा दिया।

Answer

रात की नीरवता में ढोलक की आवाज़ बीमार और निराश लोगों को साहस देती थी। उन्हें कुश्ती का दृश्य याद आता और वे मृत्यु के डर से कुछ देर बाहर निकल पाते थे। ढोल बीमारी का इलाज नहीं था, पर उसने लोगों को मानसिक सहारा दिया।

Question पाठ के साथ, q6

महामारी के बाद गाँव में सूर्योदय और सूर्यास्त का दृश्य कैसे बदल जाता था?

Steps only

दिन में लोग एक-दूसरे को ढाढ़स बँधाते और कुछ कामकाज करते, इसलिए हलचल सुनाई देती थी। सूर्यास्त के बाद सब झोपड़ियों में चुप हो जाते; बीमारी, थकान और अपनों को खोने के डर से बोलने की शक्ति भी नहीं रहती थी। रात में ढोलक ही उस सन्नाटे को चुनौती देती थी।

Answer

दिन में लोग एक-दूसरे को ढाढ़स बँधाते और कुछ कामकाज करते, इसलिए हलचल सुनाई देती थी। सूर्यास्त के बाद सब झोपड़ियों में चुप हो जाते; बीमारी, थकान और अपनों को खोने के डर से बोलने की शक्ति भी नहीं रहती थी। रात में ढोलक ही उस सन्नाटे को चुनौती देती थी।

Question पाठ के साथ, q7a

पहले राजाओं और लोगों से पहलवानों को सम्मान मिलता था। आज वैसा संरक्षण कम क्यों दिखाई देता है?

Steps only

समय के साथ राजदरबार और उसके संरक्षण की व्यवस्था बदल गई। मनोरंजन और खेलों के नए रूप सामने आए और कुश्ती को मिलने वाला पुराना आश्रय घटा। आज भी पहलवानों को सम्मान मिल सकता है, पर उसके लिए खेल संस्थाओं, प्रशिक्षण केंद्रों और समुदायों का लगातार सहयोग जरूरी है।

Answer

समय के साथ राजदरबार और उसके संरक्षण की व्यवस्था बदल गई। मनोरंजन और खेलों के नए रूप सामने आए और कुश्ती को मिलने वाला पुराना आश्रय घटा। आज भी पहलवानों को सम्मान मिल सकता है, पर उसके लिए खेल संस्थाओं, प्रशिक्षण केंद्रों और समुदायों का लगातार सहयोग जरूरी है।

Question पाठ के साथ, q7b

कुश्ती की जगह या उसके साथ आज कौन-से खेल लोकप्रिय हुए हैं?

Steps only

आज क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन, कबड्डी और अन्य खेल लोकप्रिय हैं। दर्शकों की रुचि, मीडिया और उपलब्ध सुविधाओं के कारण खेलों की लोकप्रियता क्षेत्र और समय के अनुसार बदलती रहती है। कुश्ती भी ओलंपिक, स्कूलों और अखाड़ों में खेली जाती है।

Answer

आज क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन, कबड्डी और अन्य खेल लोकप्रिय हैं। दर्शकों की रुचि, मीडिया और उपलब्ध सुविधाओं के कारण खेलों की लोकप्रियता क्षेत्र और समय के अनुसार बदलती रहती है। कुश्ती भी ओलंपिक, स्कूलों और अखाड़ों में खेली जाती है।

Question पाठ के साथ, q7c

कुश्ती को फिर से लोकप्रिय बनाने के लिए क्या किया जा सकता है?

Steps only

स्कूलों और समुदायों में सुरक्षित अभ्यास की सुविधा, प्रशिक्षित कोच और प्रतियोगिताएँ उपलब्ध कराई जा सकती हैं। खिलाड़ियों को पोषण, पढ़ाई और चोट से बचाव की जानकारी भी मिले। स्थानीय अखाड़ों और महिला तथा पुरुष खिलाड़ियों को समान अवसर देना खेल को अधिक लोगों तक पहुँचा सकता है।

Answer

स्कूलों और समुदायों में सुरक्षित अभ्यास की सुविधा, प्रशिक्षित कोच और प्रतियोगिताएँ उपलब्ध कराई जा सकती हैं। खिलाड़ियों को पोषण, पढ़ाई और चोट से बचाव की जानकारी भी मिले। स्थानीय अखाड़ों और महिला तथा पुरुष खिलाड़ियों को समान अवसर देना खेल को अधिक लोगों तक पहुँचा सकता है।

Question पाठ के साथ, प्रश्न 8 (क)

रोग और अकाल से घिरे गाँव के संदर्भ में “भावुक तारे” के पृथ्वी तक पहुँचने की कल्पना क्या बताती है?

Steps only

भावुक तारा गाँव तक रोशनी या मदद पहुँचाना चाहता है, पर रास्ते में ही बुझ जाता है। इससे महामारी-ग्रस्त गाँव की निराशा और असहायता दिखती है।

Answer

भावुक तारा गाँव तक रोशनी या मदद पहुँचाना चाहता है, पर रास्ते में ही बुझ जाता है। इससे महामारी-ग्रस्त गाँव की निराशा और असहायता दिखती है।

Question पाठ के साथ, q9

कहानी से प्रकृति के मानवीकरण के उदाहरण चुनकर उनका भाव स्पष्ट कीजिए।

Steps only

सन्नाटे और रात को जीवित शक्तियों जैसा रूप दिया गया है; ढोलक की थाप मानो रात के भय को चुनौती देती है।

Answer

सन्नाटे और रात को जीवित शक्तियों जैसा रूप दिया गया है; ढोलक की थाप मानो रात के भय को चुनौती देती है।

पाठ के आसपास

Textbook pages NCERT आरोह भाग 2, अध्याय 13

Question पाठ के आसपास, around1

कहानी के महामारी-ग्रस्त गाँव जैसी किसी आपदा की कल्पना करें। ऐसी स्थिति में आप कैसे तैयारी और सहायता करेंगे?

Steps only

पहले स्थानीय प्रशासन या आपदा सेवा से मिली सुरक्षित जानकारी का पालन करूँगा/करूँगी। परिवार के लिए संपर्क योजना, जरूरी दवाएँ और पानी तैयार रखूँगा/रखूँगी। पड़ोस में बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों की जरूरत पूछूँगा/पूछूँगी और जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित सहायता बुलाऊँगा/बुलाऊँगी। बीमारी के समय अफवाह या अप्रमाणित इलाज नहीं फैलाऊँगा/फैलाऊँगी।

Answer

पहले स्थानीय प्रशासन या आपदा सेवा से मिली सुरक्षित जानकारी का पालन करूँगा/करूँगी। परिवार के लिए संपर्क योजना, जरूरी दवाएँ और पानी तैयार रखूँगा/रखूँगी। पड़ोस में बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों की जरूरत पूछूँगा/पूछूँगी और जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित सहायता बुलाऊँगा/बुलाऊँगी। बीमारी के समय अफवाह या अप्रमाणित इलाज नहीं फैलाऊँगा/फैलाऊँगी।

Question पाठ के आसपास, around2

बीमार और डरे हुए गाँव को ढोलक की थाप से सहारा मिलता है। कला जीवन को किस तरह सहारा दे सकती है?

Steps only

गीत, नाटक, चित्र और संगीत कठिन समय में लोगों को अपनी भावना व्यक्त करने, एक-दूसरे से जुड़ने और आशा बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। कला इलाज या राहत का स्थान नहीं लेती, लेकिन लोगों को मानसिक और सामुदायिक सहारा देती है।

Answer

गीत, नाटक, चित्र और संगीत कठिन समय में लोगों को अपनी भावना व्यक्त करने, एक-दूसरे से जुड़ने और आशा बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। कला इलाज या राहत का स्थान नहीं लेती, लेकिन लोगों को मानसिक और सामुदायिक सहारा देती है।

Question पाठ के आसपास, around3

“कलाओं का अस्तित्व व्यवस्था का मोहताज नहीं”—इस विचार पर चर्चा कीजिए।

Steps only

कला किसी दरबार या संस्था के बिना भी लोकगीत, कहानी, नृत्य और सामुदायिक अभ्यास के रूप में जीवित रह सकती है। फिर भी कलाकारों को अभ्यास की जगह, समय और आय के लिए सहयोग चाहिए। इसलिए कला लोगों की भागीदारी से चल सकती है, जबकि कलाकारों को टिके रहने के लिए उचित सम्मान और संसाधन मिलना चाहिए।

Answer

कला किसी दरबार या संस्था के बिना भी लोकगीत, कहानी, नृत्य और सामुदायिक अभ्यास के रूप में जीवित रह सकती है। फिर भी कलाकारों को अभ्यास की जगह, समय और आय के लिए सहयोग चाहिए। इसलिए कला लोगों की भागीदारी से चल सकती है, जबकि कलाकारों को टिके रहने के लिए उचित सम्मान और संसाधन मिलना चाहिए।

भाषा की बात

Textbook pages NCERT आरोह भाग 2, अध्याय 13

Question भाषा की बात, language1

कहानी में कुश्ती से जुड़े शब्द चुनिए और चिकित्सा, क्रिकेट, न्यायालय तथा अपनी पसंद के किसी क्षेत्र के पाँच-पाँच शब्द दीजिए।

Steps only

कुश्ती: अखाड़ा, दंगल, दाँव, पेंच, पटखनी। चिकित्सा: रोगी, लक्षण, जाँच, उपचार, दवा। क्रिकेट: बल्लेबाज, गेंदबाज, विकेट, रन, पारी। न्यायालय: न्यायाधीश, वकील, सुनवाई, साक्ष्य, फैसला। संगीत: सुर, ताल, लय, राग, वाद्य। इन शब्दों से हर क्षेत्र की अपनी विशेष शब्दावली बनती है।

Answer

कुश्ती: अखाड़ा, दंगल, दाँव, पेंच, पटखनी। चिकित्सा: रोगी, लक्षण, जाँच, उपचार, दवा। क्रिकेट: बल्लेबाज, गेंदबाज, विकेट, रन, पारी। न्यायालय: न्यायाधीश, वकील, सुनवाई, साक्ष्य, फैसला। संगीत: सुर, ताल, लय, राग, वाद्य। इन शब्दों से हर क्षेत्र की अपनी विशेष शब्दावली बनती है।

Question भाषा की बात, language2

नीचे दिए गए विशेष भाषा-प्रयोगों का उपयोग करके एक छोटा अनुच्छेद लिखिए।

Steps only

मेहनती धावक अंतिम मोड़ पर अपने प्रतिद्वंद्वी पर बाज़ की तरह टूट पड़ा। उसकी लगातार जीत ने विद्यालय की खेल-टीम की प्रतिष्ठा में चार चाँद लगा दिए। जीत के बाद उसने अपने प्रशिक्षक को धन्यवाद दिया और कहा कि सफलता अभ्यास और साथियों के सहयोग से मिली।

Answer

मेहनती धावक अंतिम मोड़ पर अपने प्रतिद्वंद्वी पर बाज़ की तरह टूट पड़ा। उसकी लगातार जीत ने विद्यालय की खेल-टीम की प्रतिष्ठा में चार चाँद लगा दिए। जीत के बाद उसने अपने प्रशिक्षक को धन्यवाद दिया और कहा कि सफलता अभ्यास और साथियों के सहयोग से मिली।

Question भाषा की बात, language3

कहानी में कुश्ती की कमेंट्री को क्रिकेट-कमेंट्री से मिलाकर देखिए। दोनों में क्या समानता और अंतर है?

Steps only

दोनों में कमेंटेटर खेल की तेज गतिविधि बताता है और दर्शकों का उत्साह बनाए रखता है। क्रिकेट में गेंद, रन और विकेट के आधार पर खेल का वर्णन होता है; कुश्ती में दाँव, पकड़ और पहलवानों की चाल का। दोनों की भाषा खेल के विशेष शब्दों और बदलती गति से बनती है।

Answer

दोनों में कमेंटेटर खेल की तेज गतिविधि बताता है और दर्शकों का उत्साह बनाए रखता है। क्रिकेट में गेंद, रन और विकेट के आधार पर खेल का वर्णन होता है; कुश्ती में दाँव, पकड़ और पहलवानों की चाल का। दोनों की भाषा खेल के विशेष शब्दों और बदलती गति से बनती है।

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