कक्षा 11 · Antral · अध्याय 2
आवारा मसीहा — विष्णु प्रभाकर
शरत्चंद्र के बचपन, शिक्षा, खेल और पिता के स्वभाव को सरल प्रश्नोत्तर में समझें।
5 उत्तरसरल हिंदी
5 worked answers · short steps first, explanations when you need them
प्रश्न-अभ्यास
Textbook pages NCERT अंतराल भाग 1, अध्याय 2
Question प्रश्न-अभ्यास
लेखक ने कहा कि शरत् पहले साहित्य को दुख देने वाला समझता था। ऐसा क्यों? साहित्य के और कौन-से उद्देश्य हो सकते हैं?
कठिन किताबों और रोज़ की परीक्षा से शरत् को साहित्य दुखद लगा। बाद में उसे साहित्य से आनंद, कल्पना और जीवन की समझ मिली।
Answer
कठिन किताबों और रोज़ की परीक्षा से शरत् को साहित्य दुखद लगा। बाद में उसे साहित्य से आनंद, कल्पना और जीवन की समझ मिली।
Question प्रश्न-अभ्यास
पाठ के आधार पर पुराने और वर्तमान पढ़ने-पढ़ाने के तरीकों में क्या अंतर और समानता है? आप किस तरीके के पक्ष में हैं?
पहले पाठ याद करके रोज़ सुनाना पड़ता था; आज भी पढ़ना ज़रूरी है, पर चर्चा और गतिविधियाँ भी होती हैं। समझकर सीखना बेहतर है।
Answer
पहले पाठ याद करके रोज़ सुनाना पड़ता था; आज भी पढ़ना ज़रूरी है, पर चर्चा और गतिविधियाँ भी होती हैं। समझकर सीखना बेहतर है।
Question प्रश्न-अभ्यास
पाठ की कौन-सी बाल-शरारत आपको अच्छी लगी और क्यों? आज बच्चों की ऐसी गतिविधियों में क्या बदलाव आया है?
नमूना: शरत् का पतंग उड़ाने के लिए छुट्टी से निकलना अच्छा लगा, क्योंकि वह खेल का मौका ढूँढ़ता है। आज कई बच्चे स्क्रीन पर भी समय बिताते हैं।
Answer
नमूना: शरत् का पतंग उड़ाने के लिए छुट्टी से निकलना अच्छा लगा, क्योंकि वह खेल का मौका ढूँढ़ता है। आज कई बच्चे स्क्रीन पर भी समय बिताते हैं।
Question प्रश्न-अभ्यास
नाना के घर किन बातों का निषेध था और शरत् को वे काम करना क्यों पसंद था?
खेल, पतंग, लट्टू, तितली पालने और बाग लगाने पर रोक थी। शरत् को इनमें आनंद और अपनी पसंद से काम करने की खुशी मिलती थी।
Answer
खेल, पतंग, लट्टू, तितली पालने और बाग लगाने पर रोक थी। शरत् को इनमें आनंद और अपनी पसंद से काम करने की खुशी मिलती थी।
Question प्रश्न-अभ्यास
शरत् और उसके पिता मोतीलाल के स्वभाव में कौन-सी समानताएँ थीं? उदाहरण दीजिए।
मोतीलाल लिखते और चित्र बनाते थे; शरत् को भी कल्पना, खेल और प्रकृति से प्रेम था। दोनों अपनी रुचि से काम करना पसंद करते थे।
Answer
मोतीलाल लिखते और चित्र बनाते थे; शरत् को भी कल्पना, खेल और प्रकृति से प्रेम था। दोनों अपनी रुचि से काम करना पसंद करते थे।