Question मौखिक, प्रश्न 1
बड़े-बड़े बिल्डर समुद्र को पीछे क्यों धकेल रहे थे?
वे समुद्र की जमीन पर कब्ज़ा करके वहाँ निर्माण करना चाहते थे।
Answer
वे समुद्र की जमीन पर कब्ज़ा करके वहाँ निर्माण करना चाहते थे।
कक्षा 10 · Sparsh · अध्याय 12
प्रकृति और जीवों के प्रति संवेदना पर पाठ्यपुस्तक प्रश्नों, भाषा-अभ्यास और गतिविधियों के सरल उत्तर।
25 worked answers · short steps first, explanations when you need them
Textbook pages NCERT स्पर्श भाग 2, अध्याय 12
Question मौखिक, प्रश्न 1
वे समुद्र की जमीन पर कब्ज़ा करके वहाँ निर्माण करना चाहते थे।
वे समुद्र की जमीन पर कब्ज़ा करके वहाँ निर्माण करना चाहते थे।
Question मौखिक, प्रश्न 2
लेखक का पुराना घर ग्वालियर में था। बाद में वे मुंबई के वर्सोवा में रहने लगे।
लेखक का पुराना घर ग्वालियर में था। बाद में वे मुंबई के वर्सोवा में रहने लगे।
Question मौखिक, प्रश्न 3
पहले बड़े घर और खुले आँगन थे। बढ़ती आबादी के कारण जगह कम हुई और घर छोटे होते गए; इस तरह जीवन घरों में सिमटने लगा।
पहले बड़े घर और खुले आँगन थे। बढ़ती आबादी के कारण जगह कम हुई और घर छोटे होते गए; इस तरह जीवन घरों में सिमटने लगा।
Question मौखिक, प्रश्न 4
कबूतरों ने रोशनदान में दो अंडे दिए थे। एक अंडा बिल्ली ने तोड़ा और दूसरा लेखक की माँ से सँभालते समय टूट गया। दोनों अंडों के टूटने से कबूतर व्याकुल थे।
कबूतरों ने रोशनदान में दो अंडे दिए थे। एक अंडा बिल्ली ने तोड़ा और दूसरा लेखक की माँ से सँभालते समय टूट गया। दोनों अंडों के टूटने से कबूतर व्याकुल थे।
Question लिखित (क), प्रश्न 1
नूह अरब के एक पैगंबर थे। उन्होंने एक घायल कुत्ते को दुत्कार दिया; कुत्ते के उत्तर ने उन्हें अपनी कठोरता का एहसास कराया। इस करुणा और पश्चात्ताप के कारण वे नूह के नाम से याद किए जाते हैं।
नूह अरब के एक पैगंबर थे। उन्होंने एक घायल कुत्ते को दुत्कार दिया; कुत्ते के उत्तर ने उन्हें अपनी कठोरता का एहसास कराया। इस करुणा और पश्चात्ताप के कारण वे नूह के नाम से याद किए जाते हैं।
Question लिखित (क), प्रश्न 2
लेखक की माँ सूरज ढलने के बाद पेड़ों से पत्ते तोड़ने से मना करती थीं। उनका विश्वास था कि पेड़ भी जीवित हैं और रात में उनके पत्ते तोड़ने से उन्हें दुख होगा।
लेखक की माँ सूरज ढलने के बाद पेड़ों से पत्ते तोड़ने से मना करती थीं। उनका विश्वास था कि पेड़ भी जीवित हैं और रात में उनके पत्ते तोड़ने से उन्हें दुख होगा।
Question लिखित (क), प्रश्न 3
पेड़ कटने और प्राकृतिक आवास घटने से मौसम का संतुलन बिगड़ा। तेज गर्मी, बेमौसम बारिश, आँधी-तूफ़ान और बाढ़ जैसी घटनाएँ बढ़ीं; नए रोगों से जीव-जंतुओं को भी नुकसान हुआ।
पेड़ कटने और प्राकृतिक आवास घटने से मौसम का संतुलन बिगड़ा। तेज गर्मी, बेमौसम बारिश, आँधी-तूफ़ान और बाढ़ जैसी घटनाएँ बढ़ीं; नए रोगों से जीव-जंतुओं को भी नुकसान हुआ।
Question लिखित (क), प्रश्न 4
कबूतरों के दो अंडों में से एक बिल्ली ने तोड़ दिया था और दूसरा लेखक की माँ से सँभालते समय टूट गया। उन्हें अपनी गलती का दुख हुआ, इसलिए उन्होंने पूरे दिन रोज़ा रखकर क्षमा की प्रार्थना की।
कबूतरों के दो अंडों में से एक बिल्ली ने तोड़ दिया था और दूसरा लेखक की माँ से सँभालते समय टूट गया। उन्हें अपनी गलती का दुख हुआ, इसलिए उन्होंने पूरे दिन रोज़ा रखकर क्षमा की प्रार्थना की।
Question लिखित (क), प्रश्न 5
ग्वालियर से मुंबई आने तक लेखक ने पेड़ों और खुले स्थानों की जगह नई बस्तियाँ और चौड़ी सड़कें बनते देखीं। पक्षियों और दूसरे जीवों के घर छिन गए; कुछ चले गए और कुछ इमारतों में बसेरा करने लगे।
ग्वालियर से मुंबई आने तक लेखक ने पेड़ों और खुले स्थानों की जगह नई बस्तियाँ और चौड़ी सड़कें बनते देखीं। पक्षियों और दूसरे जीवों के घर छिन गए; कुछ चले गए और कुछ इमारतों में बसेरा करने लगे।
Question लिखित (क), प्रश्न 6
“डेरा डालना” यानी किसी जगह अस्थायी रूप से ठहरना या अपना बसेरा बनाना। पाठ में पक्षियों के लिए भी यह प्रयोग है—वे शहर छोड़ नहीं सके, इसलिए इमारतों में घोंसले बनाने लगे।
“डेरा डालना” यानी किसी जगह अस्थायी रूप से ठहरना या अपना बसेरा बनाना। पाठ में पक्षियों के लिए भी यह प्रयोग है—वे शहर छोड़ नहीं सके, इसलिए इमारतों में घोंसले बनाने लगे।
Question लिखित (क), प्रश्न 7
शेख अयाज़ के पिता ने बाजू पर चींटा देखा तो समझा कि वह कुएँ के पास अपने घर से दूर आ गया है। वे भोजन छोड़कर उसे उसके घर तक पहुँचाने चले गए, क्योंकि वे छोटे जीव को भी बेघर नहीं रखना चाहते थे।
शेख अयाज़ के पिता ने बाजू पर चींटा देखा तो समझा कि वह कुएँ के पास अपने घर से दूर आ गया है। वे भोजन छोड़कर उसे उसके घर तक पहुँचाने चले गए, क्योंकि वे छोटे जीव को भी बेघर नहीं रखना चाहते थे।
Question लिखित (ख), प्रश्न 1
बढ़ती आबादी के लिए घर और संसाधन जुटाने में जंगल काटे गए और समुद्र के किनारे पर बस्तियाँ बनाई गईं। इससे पर्यावरण असंतुलित हुआ और पक्षियों तथा जानवरों के प्राकृतिक आवास घटे। पाठ के अनुसार मौसम में असंतुलन, बाढ़, तूफ़ान और नए रोग जैसी समस्याएँ भी बढ़ीं।
बढ़ती आबादी के लिए घर और संसाधन जुटाने में जंगल काटे गए और समुद्र के किनारे पर बस्तियाँ बनाई गईं। इससे पर्यावरण असंतुलित हुआ और पक्षियों तथा जानवरों के प्राकृतिक आवास घटे। पाठ के अनुसार मौसम में असंतुलन, बाढ़, तूफ़ान और नए रोग जैसी समस्याएँ भी बढ़ीं।
Question लिखित (ख), प्रश्न 2
कबूतरों ने लेखक के फ्लैट में घोंसला बनाकर बच्चे दिए थे। उनके बार-बार आने-जाने से सामान गिरता-टूटता और किताबें गंदी होती थीं। इस परेशानी से बचने के लिए लेखक की पत्नी ने खिड़की पर जाली लगवाई और कबूतरों के आने का रास्ता बंद किया।
कबूतरों ने लेखक के फ्लैट में घोंसला बनाकर बच्चे दिए थे। उनके बार-बार आने-जाने से सामान गिरता-टूटता और किताबें गंदी होती थीं। इस परेशानी से बचने के लिए लेखक की पत्नी ने खिड़की पर जाली लगवाई और कबूतरों के आने का रास्ता बंद किया।
Question लिखित (ख), प्रश्न 3
बिल्डर समुद्र के किनारे की जमीन पर इमारतें बनाकर समुद्र को पीछे धकेल रहे थे। लंबे समय तक जगह घटने के बाद समुद्र का गुस्सा तूफ़ान के रूप में फूटा। उसने अपने ऊपर चल रहे तीन जहाज़ों को लहरों से उठाकर किनारे की ओर पटक दिया।
बिल्डर समुद्र के किनारे की जमीन पर इमारतें बनाकर समुद्र को पीछे धकेल रहे थे। लंबे समय तक जगह घटने के बाद समुद्र का गुस्सा तूफ़ान के रूप में फूटा। उसने अपने ऊपर चल रहे तीन जहाज़ों को लहरों से उठाकर किनारे की ओर पटक दिया।
Question लिखित (ख), प्रश्न 4
इन पंक्तियों का भाव है कि अंत में सब मिट्टी में मिल जाते हैं और उनके अलग-अलग निशान मिट जाते हैं। तब यह पहचानना कठिन होता है कि किसमें कौन-सी मिट्टी कितनी है। इसी तरह हर प्राणी का जीवन मूल्यवान है; किसी को छोटा या तुच्छ नहीं समझना चाहिए।
इन पंक्तियों का भाव है कि अंत में सब मिट्टी में मिल जाते हैं और उनके अलग-अलग निशान मिट जाते हैं। तब यह पहचानना कठिन होता है कि किसमें कौन-सी मिट्टी कितनी है। इसी तरह हर प्राणी का जीवन मूल्यवान है; किसी को छोटा या तुच्छ नहीं समझना चाहिए।
Question आशय, प्रश्न 1
प्रकृति बहुत कुछ सहती है, लेकिन उसकी सहनशक्ति असीमित नहीं है। जब मनुष्य जंगल काटकर, समुद्र की जगह घेरकर और पर्यावरण बिगाड़कर सीमा पार करता है, तो प्रकृति तूफ़ान, बाढ़ या दूसरी आपदाओं के रूप में प्रतिक्रिया देती है।
प्रकृति बहुत कुछ सहती है, लेकिन उसकी सहनशक्ति असीमित नहीं है। जब मनुष्य जंगल काटकर, समुद्र की जगह घेरकर और पर्यावरण बिगाड़कर सीमा पार करता है, तो प्रकृति तूफ़ान, बाढ़ या दूसरी आपदाओं के रूप में प्रतिक्रिया देती है।
Question आशय, प्रश्न 2
विशाल समुद्र लंबे समय तक मनुष्य के अतिक्रमण को सहता रहा। जब बिल्डरों ने उसे लगातार पीछे धकेला, तब उसका क्रोध तूफ़ान बनकर प्रकट हुआ। कथन बताता है कि धैर्यवान व्यक्ति या प्रकृति की शांति को कमजोरी नहीं मानना चाहिए।
विशाल समुद्र लंबे समय तक मनुष्य के अतिक्रमण को सहता रहा। जब बिल्डरों ने उसे लगातार पीछे धकेला, तब उसका क्रोध तूफ़ान बनकर प्रकट हुआ। कथन बताता है कि धैर्यवान व्यक्ति या प्रकृति की शांति को कमजोरी नहीं मानना चाहिए।
Question आशय, प्रश्न 3
बस्ती और इमारतों के फैलाव ने पशु-पक्षियों के पुराने आवास नष्ट कर दिए। कुछ जीव वहाँ से चले गए और जो नहीं जा सके, उन्होंने घरों और इमारतों में नए बसेरे बनाए। लेखक इस तरह मनुष्य के विकास से दूसरे जीवों को हुए नुकसान की ओर ध्यान दिलाते हैं।
बस्ती और इमारतों के फैलाव ने पशु-पक्षियों के पुराने आवास नष्ट कर दिए। कुछ जीव वहाँ से चले गए और जो नहीं जा सके, उन्होंने घरों और इमारतों में नए बसेरे बनाए। लेखक इस तरह मनुष्य के विकास से दूसरे जीवों को हुए नुकसान की ओर ध्यान दिलाते हैं।
Question आशय, प्रश्न 4
शेख अयाज़ के पिता को लगा कि चींटा अपने घर से दूर होकर बेघर हो गया है। उन्होंने अपना भोजन छोड़कर उसे कुएँ के पास उसके घर पहुँचाने का निश्चय किया। उनके शब्दों से हर जीव के प्रति करुणा और जिम्मेदारी का भाव प्रकट होता है।
शेख अयाज़ के पिता को लगा कि चींटा अपने घर से दूर होकर बेघर हो गया है। उन्होंने अपना भोजन छोड़कर उसे कुएँ के पास उसके घर पहुँचाने का निश्चय किया। उनके शब्दों से हर जीव के प्रति करुणा और जिम्मेदारी का भाव प्रकट होता है।
Question भाषा-अध्ययन, प्रश्न 1
(क) ‘के लिए’—सम्प्रदान कारक। (ख) ‘ने’—कर्ता कारक और ‘को’—कर्म कारक। (ग) ‘में’—अधिकरण कारक। (घ) ‘पर’—अधिकरण कारक और ‘को’—कर्म कारक।
(क) ‘के लिए’—सम्प्रदान कारक। (ख) ‘ने’—कर्ता कारक और ‘को’—कर्म कारक। (ग) ‘में’—अधिकरण कारक। (घ) ‘पर’—अधिकरण कारक और ‘को’—कर्म कारक।
Question भाषा-अध्ययन, प्रश्न 2
चींटियाँ, घोड़े, आवाज़ें, बिलें, फ़ौजें, रोटियाँ, बिंदुओं, दीवारें, टुकड़े।
चींटियाँ, घोड़े, आवाज़ें, बिलें, फ़ौजें, रोटियाँ, बिंदुओं, दीवारें, टुकड़े।
Question भाषा-अध्ययन, प्रश्न 3
(क) जमाना; (ख) सजा; (ग) जरा; (घ) जमाना; (ङ) सज़ा; (च) तेज।
(क) जमाना; (ख) सजा; (ग) जरा; (घ) जमाना; (ङ) सज़ा; (च) तेज।
Question योग्यता विस्तार, प्रश्न 1
केंद्र के कर्मचारियों से पूछें कि घायल जीवों को कैसे लाया जाता है, उनका उपचार और भोजन कैसे होता है, और स्वस्थ होने पर उन्हें कहाँ छोड़ा जाता है। अपने देखे हुए तथ्यों को लिखें; यदि केंद्र नहीं जा सकते, तो किसी विश्वसनीय संस्था की जानकारी लेकर स्रोत लिखें।
केंद्र के कर्मचारियों से पूछें कि घायल जीवों को कैसे लाया जाता है, उनका उपचार और भोजन कैसे होता है, और स्वस्थ होने पर उन्हें कहाँ छोड़ा जाता है। अपने देखे हुए तथ्यों को लिखें; यदि केंद्र नहीं जा सकते, तो किसी विश्वसनीय संस्था की जानकारी लेकर स्रोत लिखें।
Question परियोजना कार्य, प्रश्न 1
अपने घर या विद्यालय के लिए स्थानीय मौसम में पनपने वाला पौधा चुनें। उसे उचित जगह लगाएँ, नियमित पानी दें और उसकी वृद्धि दर्ज करें। पौधे को बचाने के लिए आसपास कचरा न जमा होने दें। परियोजना में तारीख, पौधे का नाम और समय-समय पर बदलाव लिखें।
अपने घर या विद्यालय के लिए स्थानीय मौसम में पनपने वाला पौधा चुनें। उसे उचित जगह लगाएँ, नियमित पानी दें और उसकी वृद्धि दर्ज करें। पौधे को बचाने के लिए आसपास कचरा न जमा होने दें। परियोजना में तारीख, पौधे का नाम और समय-समय पर बदलाव लिखें।
Question परियोजना कार्य, प्रश्न 2
उदाहरण के लिए, मेले में बंदर या भालू से करतब करवाना अथवा पक्षियों को पिंजरे में रखकर दिखाना। यह मनोरंजन जीवों के लिए तनाव और तकलीफ़ पैदा कर सकता है। बेहतर है कि हम ऐसे कार्यक्रमों के बजाय पशु-पक्षियों को उनके प्राकृतिक वातावरण में देखें और उनके संरक्षण का समर्थन करें। अपने क्षेत्र का वास्तविक उदाहरण हो तो उसे संवेदनशीलता से लिखें।
उदाहरण के लिए, मेले में बंदर या भालू से करतब करवाना अथवा पक्षियों को पिंजरे में रखकर दिखाना। यह मनोरंजन जीवों के लिए तनाव और तकलीफ़ पैदा कर सकता है। बेहतर है कि हम ऐसे कार्यक्रमों के बजाय पशु-पक्षियों को उनके प्राकृतिक वातावरण में देखें और उनके संरक्षण का समर्थन करें। अपने क्षेत्र का वास्तविक उदाहरण हो तो उसे संवेदनशीलता से लिखें।